Suri Vansh Sur Empire Suri Dynasty History – सूरी वंश सूरी वंशावली (1540-1556)
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शेर शाह सूरी का कार्यकाल (1540-1545)
सूरी वंश का संस्थापक शेर शाह सूरी ही था। इसका बचपन का नाम फरीद था। उसने एक शेर को मारा था इसलिए इसे शेर खा की उपाधि दी गयी।
बंगाल के राजयपाल (गवर्नर) ने इसको शेर खा की उपाधि दी जिसका नाम था बाबर खान लोहानी।
चुनार के किलेदार ताज खा की पत्नी थी जिससे शेर खा ने शादी कर ली थी और इससे उसका चुनार के किले पर अधिकार भी हो गया।
चुनार के किले पर आक्रमण – 1532
यह आक्रमण हुमायुँ ने किया था शेर शाह सूरी पर। जिसमे शेर शाह सूरी की हार हुई और हुमायुँ की जीत हुई और बदले में शेर शाह सूरी को अपने कई किले हुमायुँ को देने पड़े।
चौसा का युद्ध – 1539
यह युद्ध शेर शाह सूरी और हुमायुँ के बीच हुआ था जिसमे हुमायुँ की हार हुई और शेर शाह सूरी ने चौसा पर कब्ज़ा कर लिया और शेर शाह की उपाधि धारण कर ली।
बिलग्राम या कन्नौज का युद्ध – 1540
यह युद्ध शेर शाह सूरी और हुमायुँ के बीच हुआ था जिसमे हुमायुँ की हार हुई। और दिल्ली पर शेर शाह सूरी का अधिकार हो गया और सूरी वंश की स्थापना हुई।
शेर शाह सूरी के कार्य
शेर शाह सूरी के समय में एक इतिहासकार था जिसका नाम था अब्बास सरवानी। इसने शेर शाह सूरी की काफी तारीफ की है।
शेर शाह सूरी एक सुन्नी मुस्लमान था
शेर शाह सूरी ने सड़के और सराय बनवायी। जिसे साम्राज्य की धमनियाँ कहा गया।
शेर शाह सूरी धार्मिक रूप से सहिष्णु राजा था और इसने सैनिक व्यवस्था में भी काफी सुधर किये।
शेर शाह सूरी ने घिसे पिटे सिक्को की जगह पर सोने चांदी और ताम्बे के सिक्के चलवाये। और ताम्बे का दाम चलवाया।
शेर शाह सूरी ने पहली सड़क लाहौर से सोनार गांव (बंगाल) तक जाती थी उसका निर्माण करवाया यह सड़क सबसे लम्बी सड़क थी और इसे “सड़क ऐ आजम” कहा गया और आज इसी सड़क का नाम ग्रांड ट्रंक रोड है ।
शेर शाह सूरी के काल में रची गयी कुछ किताबे – पदमावत, अखरावट, बारहमासा, आखिरीकलाम। ये सभी किताबे मलिक मुहम्मद जायसी ने लिखी थी।
1545 में शेर शाह सूरी की मृत्यु हो गयी कलिंजर फतह के दौरान।
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