Suri Vansh Sur Empire Suri Dynasty History – सूरी वंश सूरी वंशावली (1540-1556)

Suri Vansh Sur Empire Suri Dynasty History – सूरी वंश सूरी वंशावली (1540-1556)

हेलो दोस्तों, आप जिस किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है उन सब परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ये नोट्स तैयार किये गए है आप इन नोट्स को पढ़ कर अपना सिलेक्शन पक्का कर सकते है किसी भी सरकारी नौकरी के पद के लिए। तो आइये दोस्तों शुरू करते है पढ़ाई। आज हम पढ़ेंगे Suri Vansh यानि सूरी वंश के बारे में की सूरी वंश कब से शुरू हुआ और कब तक चला और सूरी वंश के महत्वपूर्ण शासक कौन कौन थे और सूरी वंश में जो भी शासक हुए उनका कार्यकाल कब से लेकर कब तक था। इन सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं को हम विस्तार से पढ़ेंगे क्योंकि आने वाले एग्जाम में प्रश्न कही से भी पूछ सकते है तो इसलिए हमे अपनी तैयारी अच्छे से करनी है

शेर शाह सूरी का कार्यकाल (1540-1545)

सूरी वंश का संस्थापक शेर शाह सूरी ही था। इसका बचपन का नाम फरीद था। उसने एक शेर को मारा था इसलिए इसे शेर खा की उपाधि दी गयी।

बंगाल के राजयपाल (गवर्नर) ने इसको शेर खा की उपाधि दी जिसका नाम था बाबर खान लोहानी।

चुनार के किलेदार ताज खा की पत्नी थी जिससे शेर खा ने शादी कर ली थी और इससे उसका चुनार के किले पर अधिकार भी हो गया।

चुनार के  किले पर आक्रमण – 1532

यह आक्रमण हुमायुँ ने किया था शेर शाह सूरी पर। जिसमे शेर शाह सूरी की हार हुई और हुमायुँ की जीत हुई और बदले में शेर शाह सूरी को अपने कई किले हुमायुँ को देने पड़े।

चौसा का युद्ध – 1539 

यह युद्ध शेर शाह सूरी और हुमायुँ के बीच हुआ था जिसमे हुमायुँ की हार हुई और शेर शाह सूरी ने चौसा पर कब्ज़ा कर लिया और शेर शाह की उपाधि धारण कर ली।

बिलग्राम या कन्नौज का युद्ध – 1540

यह युद्ध शेर शाह सूरी और हुमायुँ के बीच हुआ था जिसमे हुमायुँ की हार हुई। और दिल्ली पर शेर शाह सूरी का अधिकार हो गया और सूरी वंश की स्थापना हुई।

शेर शाह सूरी के कार्य

शेर शाह सूरी के समय में एक इतिहासकार था जिसका नाम था अब्बास सरवानी। इसने शेर शाह सूरी की काफी तारीफ की है।

शेर शाह सूरी एक सुन्नी मुस्लमान था

शेर शाह सूरी ने सड़के और सराय बनवायी। जिसे साम्राज्य की धमनियाँ कहा गया।

शेर शाह सूरी धार्मिक रूप से सहिष्णु राजा था और इसने सैनिक व्यवस्था में भी काफी सुधर किये।

शेर शाह सूरी ने घिसे पिटे सिक्को की जगह पर सोने चांदी और ताम्बे के सिक्के चलवाये। और ताम्बे का दाम चलवाया

शेर शाह सूरी ने पहली सड़क लाहौर से सोनार गांव (बंगाल) तक जाती थी उसका निर्माण करवाया यह सड़क सबसे लम्बी सड़क थी और इसे “सड़क ऐ आजम” कहा गया और आज इसी सड़क का नाम ग्रांड ट्रंक रोड है ।

शेर शाह सूरी के काल में रची गयी कुछ किताबे – पदमावत, अखरावट, बारहमासा, आखिरीकलाम। ये सभी किताबे मलिक मुहम्मद जायसी ने लिखी थी।

1545 में शेर शाह सूरी की मृत्यु हो गयी कलिंजर फतह के दौरान।

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