Tuglak Vansh Santhapak Antim Sansthapak – तुगलक वंश संस्थापक (1320-1414)
हेलो दोस्तों, आप जिस किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है उन सब परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ये नोट्स तैयार किये गए है आप इन नोट्स को पढ़ कर अपना सिलेक्शन पक्का कर सकते है किसी भी सरकारी नौकरी के पद के लिए। तो आइये दोस्तों शुरू करते है पढ़ाई। आज हम पढ़ेंगे Tuglak Vansh यानि तुगलक वंश के बारे में की गुलाम वंश कब से शुरू हुआ और कब तक चला और तुगलक वंश के महत्वपूर्ण शासक कौन कौन थे और तुगलक वंश में जो भी शासक हुए उनका कार्यकाल कब से लेकर कब तक था। इन सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं को हम विस्तार से पढ़ेंगे क्योंकि आने वाले एग्जाम में प्रश्न कही से भी पूछ सकते है तो इसलिए हमे अपनी तैयारी अच्छे से करनी है
ग्यासुद्दीन तुगलक – ग्यासुद्दीन तुगलक को तुगलक वंश का संथापक कहा जाता है। ग्यासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईस्वी में नसीरुद्दीन खुसरो शाह की हत्या करके तुगलक वंश की स्थापना की थी। ग्यासुद्दीन तुगलक का शासन कल 1320 -1325 तक रहा।
ग्यासुद्दीन तुगलक इससे पहले लाहौर के निकट दीपालपुर का गवर्नर था। ग्यासुद्दीन तुगलक का दूसरा नाम गाज़ी मलिक था। गाज़ी का दूसरा अर्थ होता है “काफिरो का हत्यारा“.
दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाला यह तीसरा वंश था। ग्यासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के निकट तुगलकाबाद नमक शहर बसाया। और तुगलकाबाद को ही इसने अपनी राजधानी भी बनाया।
ग्यासुद्दीन तुगलक के बेटे का नाम मुहम्मद बिन तुगलक था “जौना खान” था। जिसे “उलगू खान” की उपाधि मिली।
ग्यासुद्दीन तुगलक ने सिचाई के लिए नहरों का निर्माण करवाया। और “अकाल निति” भी बनाई।
इबन बतूता के अनुसार ग्यासुद्दीन तुगलक की हत्या उसके ही बेटे मुहम्मद बिन तुगलक ने कराई थी। इबन बतूता मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में 8 साल से काजी के पद पर कार्य करता था।
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मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) – मुहम्मद बिन तुगलक का मूल नाम जौना खान था। और यह ग्यासुद्दीन तुगलक का बेटा था।
मुहम्मद बिन तुगलक को “रक्त का प्यासा” भी कहा जाता है। मुहम्मद बिन तुगलक को राज मुंदरी अभिलेखों में “दुनिया का खान” भी कहा जाता है।
मुहम्मद बिन तुगलक को “पागल बादशाह” और “पढ़ा लिखा मूर्ख” भी कहा जाता है।
मुहम्मद बिन तुगलक को उसकी कुछ योजनाओ के वजह से पढ़ा लिखा मूर्ख कहा गया जैसे की–
राजधानी बदल ली ( दिल्ली से देवगिरी)– देवगिरी को अब दौलताबाद कहा जाता है। और फिर 2 साल बाद फिर से दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया।
सांकेतिक मुद्रा का चलन शुरू किया (चांदी के सिक्के की जगह कांसे के सिक्के चलाये)
अकाल के समय Tax को बढ़ा दिया।
मुहम्मद बिन तुगलक के अच्छे कार्य – मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि विभाग की स्थापना की जिसे “दीवान ऐ आमिर कोही” कहा गया।
मुहम्मद बिन तुगलक ने तुगलकाबाद के नजदीक आदिलाबाद और जहाँपनाह शहर बसाया।
फ़िरोज़ शाह तुगलक , मुहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई था।
फ़िरोज़ शाह तुगलक (1351-1388) – फ़िरोज़ शाह तुगलक का राज्याभिषेक सिंधु नदी के तट पर हुआ।
फ़िरोज़ शाह तुगलक “दासो का शौकीन” था। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने दासो के लिए एक विभाग बनवाया जिसे “दीवान ऐ बन्दगान” कहा गया।
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने 300 नगरों की स्थापना की जिसमे से कुछ प्रमुख है – हिसार, फतेहाबाद, फिरोजपुर, फ़िरोज़ाबाद, जौनपुर।
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने कठोर दंड और बड़े Tax माफ़ कर दिए थे। फ़िरोज़ शाह तुगलक ने Hospital, बांध, तालाब बनवाये।
फ़िरोज़ शाह तुगलक अशोक के स्तम्भो को हरियाणा के टोपरा (अम्बाला) से और उत्तर प्रदेश के मेरठ से दिल्ली लेकर आया। और इनको उसने अपने महल के पिल्लरों में लगवा दिया।
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने आशमानी बिजली गिरने से नष्ट हुई क़ुतुब मीनार की मरम्मत करवाई।
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने 4 नए Tax लगाए – जजिया , जकात , ख़राज़ , ख़ुम्स
सितम्बर 1388 में फ़िरोज़ शाह तुगलक की मृत्यु के बाद तुगलक वंश का पतन शुरू हो गया।
फ़िरोज़ शाह तुगलक की मृत्यु के बाद नासिरूद्दीन महमूद, तुगलक वंश का अगला राजा बना जिसका शासन काल 1388 – 1412 तक रहा।
नासिरूद्दीन महमूद, तुगलक वंश का अंतिम शासक था।
नासिरूद्दीन महमूद के शासन काल में ही तैमूर ने 1398 में भारत पर आक्रमण किया और भारत में सैय्यद वंश की स्थापना की।